लाॅकडाउन में घरेलु ईंधन के परेषानियों से निजात व आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रहा बायोगैस संयंत्र कम खर्च में महिलाएं खुद से ही कर रही संयंत्र का संचालन व उपयोग, 753 से अधिक परिवारों को मिल रहा लाभ, आर्थिक सषक्तिकरण की खुली नई राह


सूरजपुर 10 मई 2020-वैष्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के रोकथाम एवं बचाव के लिए लाॅकडाउन एवं धारा 144 लागू है इसके परिपालन में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के द्वारा राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरुवां, गरुवां, घरुवां और बाडी के तहत् घरों पर मावेषियों के गोबर से न केवल उचित निदान हो रहा है वरन इसके माध्यम से गोबर गैस से प्राप्त ईंधन के माध्यम से घरों पर सुरक्षित व अल्प लागत में भोजन बनाने के लिए नियमित उपयोग कर रहे है इससे उनका अधिकांष समय घरों पर ही बीत रहा है। इससे पहले इन क्षेत्रों में खाना बनाने के लिए महिलाएं व बच्चे आसपास के क्षेत्रों से लकड़ी बीन कर लाने के साथ साथ धुएं से निजात मिली है। वर्तमान में जिले में नरुवा, गरुवा, घुरुवां और बाडी के तहत् गोबरधन योजना के माध्यम से 11 सामुदायिक बायोगैस प्लांट से 200 परिवार तथा 2 क्यूबिक मीटर के व्यक्तिगत प्लांट के माध्यम से 553 परिवारों को इस लाॅकडाउन अवधि में सुरक्षित तौर पर घरेलु ईंधन गैस के रुप में बायोगैस के माध्यम से 753 परिवार लाभ प्राप्त कर रहे है। इनके माध्यम से लाॅकडाउन अवधि में घरेलु ईंधन की जरुरत पूर्ति हेतु परेषानियों से निजात दिलाने के साथ-साथ अपने ही गांव में आत्मनिर्भरता का सफल माध्यम बनकर बायोगैस संयंत्र उभर कर सामने आया है। इससे जहां महिलाओं को खाना रासौई के धुएं से निजात मिल गई है। तो वही बच्चों को भी लकड़िया इकटठा करने के लिए बाहर घुमने की जरुरत नही पड़ रही इससे इन परिवारों के बच्चे पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दे पा रही है तो वही महिलाओं का समय बचने से खेती व अन्य कार्यं पर अपना समय दे रही है।


उक्त संबंध में विकासखण्ड भैयाथान के ग्राम पंचायत सुन्दरपुर के हितग्राही श्रीमती सुषीला सिंह ने बताया है कि लाॅकडाउन की अवधि में महिलाओं को घर पर ही रहकर उनको ईधन प्राप्त हो रही है और उनको घर से बाहर निकलने की भी जरुरत नही है। घर पर ही रहकर हर दिन बायोगैस से खाना बनाने से पहले लकड़ी सेे निकलने वाले धुएं से निजात मिली है और समय पर ही खाना बना ले रहे है।

जब से कोरोना वायरस के रोकथाम व बचाव के लिए लाॅकडाउन घोषित किया गया है तब से हमारे गांव में बायोगैस मुख्य सहारा बना हैं। क्योकि पूर्व की तरह गैस सिलेण्डर के लिए गैस एजेंसी जाना नहीं पड़ रहा है। जिस नियमों को पालन करते हुए बायोगैस से ही सभी कोरोना वायरस के रोकथाम एवं बचाव को ध्यान में रखते हुए सोषल डिस्टेंस का पालन कर नांक एवं मुहं को मास्क व गमछा से ढ़ककर तथा सेनेटाईजर एवं साबुन के द्वारा बारंबार हाथ धोकर अपने आप को सुरक्षित रख रहे हंै। प्रतिदिन बायो गैस संयंत्र में ताजे गोबर 250 किलोग्राम एवं 250 लीटर पानी की आवष्यकता पड़ती है जिसके लिए सभी लाभाविन्त परिवार सोषल डिस्टेन्स का पालन करते हुए सामूहिक सहभागिता के तहत स्वयं से सुबह शाम गोबर संयं़त्र में लाकर डालते हैं, तथा बायो गैस से निकलने वाले स्लरी खाद को आदर्ष गौठान में विक्रय करने हेतु एवं स्वयं के बाड़ी में उपयोग कर जैविक खेती को अपना रहे है।